Bihar News : बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर इलाके की एक सुबह खेतों के बीच पुलिस की कई गाड़ियां खड़ी हैं। दर्जनों पुलिसकर्मी मौजूद हैं और आसपास गांव वालों की भीड़ लगी हुई है। सामने एक युवक खड़ा है। उसके हाथ में तमंचा है। दूसरी तरफ हथियारों से लैस पुलिस वाले हैं। मगर सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि यह पूरा नजारा Facebook पर लाइव चल रहा था। अब जो तस्वीरें सामने आती हैं वह उसी Facebook लाइव की है। युवक कैमरे पर लगातार बोल रहा है। पुलिस वालों से बातचीत कर रहा है। अपनी बातें रख रहा है। लोग अपने मोबाइल पर सब कुछ लाइव देख रहे हैं। कुछ देर के बाद अचानक वो युवक अपने हाथ का तमंचा जमीन पर फेंक देता है। तमंचा पुलिस से कुछ ही कदम दूर पड़ा था। जैसे ही उसने हथियार छोड़ा, पुलिस वाले उसकी तरफ बढ़ने लगे और थोड़ी देर गोली की आवाज़ से पूरा एरिया गूज गया जिसमे Bharat Tiwari Encounter हो जाता है।

आखिर मामला यहां तक पहुंचा कैसे?
Bharat Tiwari Encounter की कहानी की शुरुआत होती है एक दिन पहले यानी कि 16 जून को। उस दिन पुलिस इसी लड़के के घर पहुंची थी। इस लड़के का नाम है भरत भूषण तिवारी। जब पुलिस उसके घर पहुंची तब भी उसके हाथ में यही तमंचा था। पुलिस और भरत के बीच करीब 4 घंटे तक बातचीत होती रही। इस दौरान भरत लगातार Facebook पर लाइव था और हाथ में तमंचा लिए पुलिस से बात कर रहा था। 4 घंटे के बाद पुलिस वहां से चली गई लेकिन हैरानी की बात यह रही कि पुलिस भरत का तमंचा अपने कब्जे में नहीं ले सकी।
रात होते ही पुलिस ने चुपचाप भरत के घर को चारों तरफ से घेर लिया। पुलिस को उम्मीद थी कि जैसे ही भरत बाहर निकलेगा उसे पकड़ लिया जाएगा। लेकिन भरत पूरी रात घर से बाहर नहीं निकला। मगर अगली सुबह भरत को पता चल गया कि पुलिस ने उसके घर को घेर रखा है। वो छत पर पहुंचा। एक बार फिर Facebook लाइव शुरू किया। उसके हाथ में तब भी तमंचा था। लाइव के दौरान उसने पुलिस को ललकारा और कुछ गोलियां भी चलाई। गोलियां चलते ही पुलिस पीछे हट गई। इसी बीच भरत अपनी बाइक को लेकर घर से निकल गया। करीब 1.5 कि.मी. दूर एक ऐसी जगह पहुंचा जहां बाढ़ पीड़ित परिवार अस्थाई शिविरों में रह रहे थे।
पुलिस पहले से उसके पीछे लगी हुई थी। वहां पहुंचते ही भरत का सामना फिर से बिहार पुलिस से हो गया। एक बार फिर से Facebook लाइव शुरू हुआ। करीब 5 मिनट तक पुलिस और भरत के बीच बातचीत चलती रही। मगर आखिरकार पुलिस के कुछ आश्वासनों के बाद भरत ने अपना तमंच जमीन पर फेंक दिया। इसके बाद उसने Facebook लाइव भी बंद कर दिया। यहीं से कहानी का सबसे विवादित हिस्सा शुरू होता है। यानी Facebook लाइव बंद होने के कुछ ही सेकंड के बाद गोलियों की आवाजें सुनाई देती हैं। कहा जा रहा है कि तीन या चार गोलियां चली थी। यह गोलियां भरत के पैरों और पेट के निचले हिस्से में लगी।
मगर सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि जिस वक्त गोली चली उस समय भरत हथियार फेंक चुका था। यानी वह निहत्ता था और माना जा रहा था कि सरेंडर करने वाला था। गंभीर रूप से घायल भरत को पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया। वहां से डॉक्टरों ने उसे पटना रेफर कर दिया। लगभग 90 किमी दूर पटना के अस्पताल ले जाया गया। लेकिन तब तक बहुत ज्यादा खून बह चुका था और आखिरकार भरत की मौत हो गई। भरत की मौत की खबर पूरे इलाके में फैल गई। लोग सड़कों पर उतर आए।
वजह सिर्फ उसकी मौत नहीं थी। ऊपर से पूरी घटना का बड़ा हिस्सा Facebook लाइव में रिकॉर्ड हो चुका था। लोगों ने अपनी आंखों से देखा था कि भरत ने तमंचा जमीन पर फेंक दिया था। यही वजह थी कि लोगों ने सवाल उठाया कि अगर वह निहत्ता था तो फिर उसका एनकाउंटर क्यों किया गया? गुस्साए लोगों ने भरत की लाश नेशनल हाईवे पर रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। एसडीएम और एसपी के खिलाफ नारेबाजी होने लगी।
अब जरा भरत की कहानी को भी जान लीजिए।
भरत के पिता बिहार पुलिस में नौकरी कर चुके थे। खुद भरत बीएससी तक पढ़ा था। नौकरी पाने की उसने काफी कोशिश की लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद उसने समाज सेवा का रास्ता चुना। बताया जाता है कि करीब 10 साल पहले उसने अपना पिंडदान भी कर दिया था और खुद को समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया था। भरत गरीबों और जरूरतमंद लोगों के लिए मदद करता था।
हाल ही में बाढ़ से प्रभावित कुछ परिवार उसके इलाके में अस्थाई शिविरों में रह रहे थे। वहां की बदहाल व्यवस्था को लेकर भरत लगातार आवाज उठा रहा था। वह अधिकारियों से भी मिला था। भरत के परिवार का आरोप है कि इसी वजह से कुछ अधिकारी उससे नाराज थे। हमारे समाज और देश में जो भी जहां भी जो कार्य होना चाहिए हर गांव हर मोहल्ले हर शहर हर कस्बे के लिए सामाजिक काम विकास का कार्य जिससे हमारा देश आगे बढ़े तो उन सभी कार्य को बिना किसी लापरवाही के साथ बिना भ्रष्टाचार के साथ और बिना किसी कुछ भी गलत कार्य के साथ अच्छे से किया जाए
मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि जिस Bharat Tiwari का बाद में एनकाउंटर हुआ उसी भरत के बारे में पुलिस ने पहले अपनी प्रेस रिलीज में लिखा था कि उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और उसे इलाज की जरूरत है। यानी पुलिस खुद मान रही थी कि भरत मानसिक रूप से अस्वस्थ था। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब पुलिस को उसकी मानसिक हालत की जानकारी थी और 16 जून को वह 4 घंटे तक उसके सामने बैठी रही तो उसी समय उसका तमंचा क्यों नहीं लिया गया? अगर पुलिस उसी दिन हथियार जब्त कर लेती तो शायद बाद में यह पूरी घटना ही ना होती।
एनकाउंटर के बाद पुलिस ने एक प्रेस रिलीज जारी करके कहा कि भरत ने पुलिस पर फायरिंग की थी। जिसके जवाब में पुलिस ने गोलियां चलाई। लेकिन कुछ समय बाद पुलिस ने वही प्रेस रिलीज हटा भी दी क्योंकि Facebook लाइव की रिकॉर्डिंग में साफ दिखाई दे रहा था कि भरत ने अपना तमंचा पहले ही फेंक दिया था।
यही वजह है कि अब पूरे मामले को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर भरत मानसिक रूप से बीमार था। पुलिस इस बात को जानती भी थी और उसने हथियार भी फेंक दिया था तो फिर आखिर गोली चलाने की जरूरत क्यों पड़ी? और इस सवाल का जवाब अब भी लोग तलाश रहे हैं।