Holi 2026 Date Alert: चंद्र ग्रहण ने बदल दिया Holika Dahan Muhurat, जानिए सूतक काल और होली कब मनाई जाएगी

इस वर्ष Holi 2026 Date, Holika Dahan Muhurat, Chand Grahan Effect को लेकर लोगों में खास उत्सुकता है क्योंकि चंद्र ग्रहण और भद्रा के कारण पर्व की पारंपरिक तारीख में बदलाव देखने को मिल सकता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा की स्थिति इस बार ऐसी बन रही है कि होली का दहन और रंगों की होली अलग-अलग दिनों में मनाई जाएगी। सालों बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब होली सामान्य समय से पहले आएगी।

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होलिका दहन कब करना है

पंचांग के मुताबिक फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा 2 मार्च की शाम 5:32 बजे से शुरू होकर 3 मार्च की शाम 4:46 बजे तक रहेगी। पूर्णिमा लगते ही भद्रा का साया भी शुरू हो जाएगा। शास्त्रों के अनुसार भद्रा काल में होलिका दहन करना वर्जित माना गया है।
इसी कारण मिथिला और काशी परंपराओं के अनुसार पंचांगों में Holi 2026 Holika Dahan Muhurat 2 मार्च को ही करने का निर्णय बताया गया है। इसके बाद 4 मार्च को धूमधाम से रंगों की होली खेली जाएगी। पिछले वर्ष जहां यह पर्व 15 मार्च को मनाया गया था, वहीं इस बार रंगों का त्योहार 4 मार्च को मनाया जाएगा।

होलिका दहन में क्या डालना चाहिए

Holi 2026 Date और धार्मिक परंपराओं के अनुसार होलिका दहन का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि विधि-विधान से होलिका की पूजा करने से जीवन के कष्ट, रोग और नकारात्मक ऊर्जा अग्नि में भस्म हो जाती है।
पूजा के दौरान अक्षत, रोली, चंदन, हल्दी, गंगाजल, दीपक और मिठाई अर्पित की जाती है। इसके बाद अग्नि में जौ, तिल, गुड़, घी, कपूर और आम की लकड़ी डालकर सात परिक्रमा की जाती है। इससे परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
होलिका दहन के बाद उसमें भुने हुए चने या गेहूं की बालियों को प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की परंपरा है, जिसे स्वास्थ्य, दीर्घायु और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।

चंद्र ग्रहण कब से कब तक रहेगा

Holi 2026 Chand Grahan Effect इस वर्ष होली की तारीख बदलने का सबसे बड़ा कारण है। 3 मार्च को शाम लगभग 5:50 बजे से 6:47 बजे तक चंद्र ग्रहण रहेगा, जो भारत में भी दिखाई देगा। इस दौरान चंद्रमा तांबे जैसा लाल दिखाई देगा, जिसे आम बोलचाल में ब्लड मून कहा जाता है।


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण लगने से लगभग 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। यानी 3 मार्च की सुबह करीब 9:00 बजे से सूतक प्रभावी हो जाएगा। सूतक काल में किसी भी शुभ और मांगलिक कार्य को वर्जित माना गया है। इसी कारण इस दिन रंग खेलना शास्त्र सम्मत नहीं माना गया और केवल जप, ध्यान व ईश्वर स्मरण को श्रेष्ठ बताया गया है। इसलिए 4 मार्च को होली खेलना धार्मिक दृष्टि से उचित रहेगा।

इस बार की होली में क्या खास है

ज्योतिषीय दृष्टि से Holi 2026 Date और ग्रह योग बेहद शुभ माने जा रहे हैं। यह पर्व पूर्वा फाल्गुनी और उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र के संयोग में आएगा। सुबह तक पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र रहेगा और इसके बाद पूरे दिन उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र प्रभावी रहेगा। साथ ही द्वितीय योग भी इस दिन विद्यमान रहेगा, जिसे शुभ माना जाता है।
सूर्य देव इस समय कुंभ राशि में शतभिषा नक्षत्र में स्थित रहेंगे। होली केवल रंगों का त्योहार नहीं बल्कि बुराई पर अच्छाई की जीत, नकारात्मकता के दहन और नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक है। इस वर्ष ग्रहों की स्थिति को देखते हुए कई ज्योतिषी इसे मानसिक शुद्धि और नई शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ समय मान रहे हैं।

Important Note: भद्रा का असर (महत्वपूर्ण)

IndiaToday की एक रिपोर्ट के अनुसार, Holi 2026 Holika Dahan Muhurat हमेशा भद्रा काल के बाद ही होता है। इस साल भी भद्रा का विशेष ध्यान रखते हुए दहन किया जाएगा। 2 मार्च की रात 08:40 बजे से लेकर लगभग 10:50 बजे तक का समय सबसे शुभ माना जा रहा है (स्थान के अनुसार इसमें थोड़ा अंतर हो सकता है)। कुछ स्थानों पर 10–20 मिनट का अंतर संभव है। 
रंगों की होली 4 मार्च को मनाई जाएगी।

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