Digital Ration Card: राशन कार्ड का झंझट ख़त्म, अब मोबाइल से मिलेगा राशन, किसानो के लिए Best स्कीम

Digital Ration Card: क्या आप राशन कार्ड के लिए लंबी लाइनों, मशीन पर अंगूठा न लगने और बार-बार सर्वर फेल होने की समस्या से परेशान हैं? अगर हां, तो आपके लिए बड़ी खुशखबरी है। केंद्र सरकार Digital Ration Card योजना के तहत राशन वितरण की पूरी व्यवस्था को बदलने जा रही है। अब न तो कागजी राशन कार्ड की जरूरत होगी और न ही बार-बार बायोमेट्रिक पहचान की झंझट। अब आपका स्मार्टफोन ही आपका डिजिटल राशन कार्ड बनेगा।

इस नई व्यवस्था का पायलट प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में शुरू किया गया है। यह मॉडल पहले गुजरात में लागू किया गया था और अब धीरे-धीरे इसे पूरे उत्तर प्रदेश और फिर देशभर में लागू करने की तैयारी है।

Digital Ration Card

सरकार को डिजिटल प्रणाली क्यों लाना पड़ रहा, इससे भ्रष्टाचार कैसे रुकेगा?

भारत दुनिया की सबसे बड़ी सब्सिडाइज्ड राशन वितरण प्रणाली चलाता है, जिसमें करीब 81.4 करोड़ लाभार्थी, 5.4 लाख उचित मूल्य की दुकानें और 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का वार्षिक बजट शामिल है। इतने बड़े सिस्टम में भ्रष्टाचार और रिसाव की समस्या लंबे समय से बनी हुई थी।

फर्जी राशन कार्ड एक बड़ी चुनौती रहे हैं, जहां आर्थिक रूप से सक्षम लोग भी गलत तरीके से सरकारी राशन का लाभ उठा रहे थे। इसके अलावा, कोटेदारों द्वारा अनाज की मात्रा में कटौती और कागजों में गलत एंट्री आम समस्या थी। बायोमेट्रिक फेल होने के कारण बुजुर्गों और मजदूरों को अक्सर राशन नहीं मिल पाता था। Digital Ration Card योजना इन सभी समस्याओं का समाधान करने के उद्देश्य से लाई जा रही है।

क्या है डिजिटल फूड कूपन और कैसे काम करेगा

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत मिलने वाला मुफ्त राशन अब डिजिटल फूड कूपन के रूप में सीधे लाभार्थी के मोबाइल वॉलेट में आएगा। यह कूपन ठीक उसी तरह काम करेगा जैसे आज के डिजिटल पेमेंट ऐप्स करते हैं।

सरकार लाभार्थी को सीधे डिजिटल फूड कूपन प्रदान करेगी और सिर्फ राशन खरीदने के लिए ही इस्तेमाल होगा । यानी कि इस डिजिटल फूड कूपन का यूज़ कहीं और नहीं किया जा सकता। सरकार सबसे पहले Month की शुरुआत में हर एक लाभार्थी के अकाउंट में डिजिटल मुद्रा जारी कर देगी। जो कि बेनिफिशरी के वॉलेट में ऐड हो जाएगा। आप राशन की दुकान पर जाएंगे, दुकान पर वह टोकन स्कैन करेगा और आपको अनाज ले लेना है। ना कार्ड दिखाने की टेंशन ना सर्वर डाउन होने पर अंगूठा फेल होने का डर सब कुछ बस एक क्लिक में।

Digital Ration Card योजना की वैधता और शर्तें

यह डिजिटल फूड कूपन केवल गेहूं और चावल पर लागू होगा और इसकी वैधता 30 दिनों की होगी। अगर 30 दिन के भीतर राशन नहीं लिया गया, तो कूपन अपने-आप समाप्त हो जाएगा। यह कूपन नॉन-ट्रांसफरेबल होगा, यानी इसे किसी और को भेजा नहीं जा सकता। लाभार्थी को खुद अपने मोबाइल के साथ राशन दुकान जाना होगा।

इससे सरकार और हमे क्या फायदे, दूरगामी सोच

इस नई व्यवस्था के तीन बड़े फायदे बताए जा रहे हैं। सबसे पहला पारदर्शिता। अनाज की हेराफेरी और फर्जीवाड़ा पूरी तरह से रुक जाएगा क्योंकि हर ट्रांजैक्शन डिजिटल रिकॉर्ड में होगी। दूसरा समय की बचत। मशीनों की तकनीकी खराबी और लंबी लाइनों से छुटकारा मिलेगा। तीसरा है लाभार्थी को यकीन रहेगा कि उसके हिस्से का अनाज कोई और नहीं निकाल सकता। डिजिटल इंडिया की दिशा में यह सरकार का एक क्रांतिकारी कदम है जो सीधे गरीब और मध्यम वर्ग की थाली से जुड़ा है।

यह सब जगह लागू किया जायेगा एलपीजी सब्सिडी में विस्तार किया जाएगा। उर्वरक और कृषि लाभ में इसका बाद में किया जाएगा और छात्रवृत्ति और सामाजिक सुरक्षा में भी इसको आगे लाया जाएगा। तो मान के चलिए कि एक पायलट प्रोजेक्ट है जो भविष्य में हर प्रकार की सामाजिक बेनिफिट योजनाओं में लागू किया जाएगा और सब जगह इसी तरीके से डिजिटल मुद्रा में भुगतान करने का डिजिटल टोकन के थ्रू भुगतान करने का प्रावधान किया जाएगा।

इसमें सबसे अच्छी चीज यह है कि आपको इस डिजिटल कल्याण राज्य में भारत के भविष्य को अगर हम देखें तो यह सुशासन बढ़ाएगा। पारदर्शिता लाएगा। डिजिटल पहचान सुनिश्चित करेगा। सभी को लाभ सीधा-सीधा प्राप्त होगा और यह पूरी की पूरी डाटा संचालित नीति निर्माण का भविष्य तैयार करेगा। जहां पर हमारे पास हर एक चीज का हर एक जो ट्रांजैक्शन है उसका डिजिटल ट्रेल होगा जिसे हम जांच भी सकते हैं।

डिजिटल राशन कार्ड योजना कब से लागू होगी?

यह व्यवस्था फिलहाल अभी ट्रायल रन पर यानी पायलट प्रोजेक्ट पर है और इसकी शुरुआत चंडीगढ़ पोंडीचेरी और गुजरात के तीन जिलों जिलों आनंद, साबरमती और दमोह में की जा रही है। यहां देखा जाएगा कि नेटवर्क या मोबाइल इस्तेमाल में लोगों को क्या दिक्कतें आ रही हैं। इन एक्सपीरियंसेस के बाद इसे दिल्ली के साथ-साथ पूरे देश में भी लागू कर दिया जाएगा।

इस योजना की सबसे बड़ी चुनौतियां

भारत के कई ग्रामीण और गरीब परिवारों के पास अभी भी स्मार्टफोन नहीं हैं। डिजिटल साक्षरता की कमी, कमजोर इंटरनेट नेटवर्क और तकनीक की सीमित पहुंच एक बड़ी चुनौती है। बुजुर्ग और निरक्षर लाभार्थी इस डिजिटल सिस्टम से वंचित हो सकते हैं, अगर उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई।

इसलिए Digital Ration Card योजना को पूरी तरह सफल बनाने के लिए सरकार को तकनीकी सुविधाओं के साथ-साथ डिजिटल शिक्षा और ऑफलाइन विकल्पों पर भी ध्यान देना होगा।

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