क्या आप कभी सोचे है कि फ़ोन में से Deleted Photos Kahan Jati Hai? जब से स्मार्टफोन आया है ना उसने ना सिर्फ लोगों के बीच की दूरी को कम कर दिया है बल्कि फोटोस खींचने के ट्रेंड को भी बढ़ा दिया है। पहले कितना तामझाम हुआ करता था। कैमरा सेट करो, लाइटिंग सही करो और फिर कैमरा के सामने देने वाले पोजेस भी बहुत लिमिटेड थे क्योंकि रील सिस्टम हुआ करता था। आप इतनी सारी फोटोज नहीं खिंचवा सकते थे क्योंकि वो महंगा पड़ता। लेकिन अब फोन से सिर्फ एक क्लिक में आपकी फोटो तैयार हो जाती है। जो फोटो पसंद आई उसे रख लो और बाकी को डिलीट कर सकते हो। टेंशन ही नहीं होती है।

लेकिन क्या डिलीट बटन को दबाने से फोटो सच में डिलीट हो जाती है या फिर हमें सिर्फ नजर नहीं आती। आमतौर पर हमको लगता है कि इसे दबाते ही फाइल्स या कोई भी डिजिटल फुटप्रिंट दुनिया से गायब हो जाता होगा। लेकिन नहीं डिजिटल दुनिया में कुछ गायब होना इतना आसान होता नहीं है। आपकी पर्सनल फोटो, प्राइवेट वीडियोस और जरूरी डॉक्यूमेंट्स डिलीट होने के बाद भी एक लंबे समय तक किसी ना किसी फॉर्म में आपके ही फोन और डिजिटल स्पेस में मौजूद रहते हैं और आपको इसकी जानकारी तक नहीं होती। जरा सोचिये की Deleted Photos Kahan Jati Hai?
Delete करने के बाद कहा Save रहता है? (Deleted Photos Kahan Jati Hai)
जब आप फोन या लैपटॉप पर डिलीट का बटन दबाते हैं, इसे एक लाइब्रेरी के उदाहरण से समझिए। मान लीजिए एक लाइब्रेरी में हजारों किताबें हैं और एक रजिस्टर है जिसमें लिखा है कौन सी किताब किस जगह पर रखी होगी। जब आप कोई फोटो डिलीट करते हैं ना तो वहां पर भी यह कुछ लाइब्रेरी सिस्टम काम करता है। Android या iOS का एक ऑपरेटिंग सिस्टम होता है जो उस फोटो को इरेज नहीं करता। बस वो अपने इंडेक्स से उस फोटो का पता हटा देता है। सिस्टम उस जगह को एंपटी यानी कि अवेलेबल मार्क कर देता है।
यानी सिस्टम अब मान लेता है कि वहां कुछ नहीं है और वहां नई फाइल्स रखी जा सकती है। इसे तकनीकी भाषा में लॉजिकल डिलीशन कहते हैं। लेकिन उस डिजिटल फोटो या फिर फाइल का बाइनरी कोड तब तक वहां पे मौजूद रहता है जब तक कि आप कोई नई फोटो ना खींच लें जो उस पुरानी जगह को पूरी तरीके से ओवराइट कर दे। कंप्यूटर और लैपटॉप में HDD यानी कि हार्ड डिस्क ड्राइव होती है । वहां से डाटा रिकवर करना बहुत आसान होता है क्योंकि डाटा जो है वो सालों तक वहीं पड़ा रहता है। लेकिन आज के स्मार्टफोनस और नए लैपटॉप में SSD होती है। यानी कि सॉलिड स्टेट ड्राइव का इस्तेमाल होता है। यह फ्लैश मेमोरी पर काम करता है। जैसे कि आपकी पेनड्राइव। SSD में एक सिस्टम काम करता है जिसे हम कहते हैं ट्रिम कमांड।
ट्रिम कमांड क्या होता है?
जब आप कुछ डिलीट करते हो तो ट्रिम आपके फोन के स्टोरेज कंट्रोलर को बताता है कि अब इस डाटा की जरूरत नहीं है। इसके बाद फोन का गार्बेज कलेक्शन सिस्टम धीरे-धीरे उन ब्लॉक्स को साफ करने लगता है। हालांकि यह प्रोसेस तुरंत नहीं होता। इसमें कभी-कभी घंटों लग जाते हैं तो कभी-कभी कई दिन और कई महीने लग जाते हैं। जब तक गार्बेज कलेक्शन अपना काम पूरा नहीं करता आपकी फोटो रिकवरेबल रहती है। यानी कि आप उसको रिकवर कर सकते हैं। ये रहा हार्डवेयर की बात ।
हम सभी के फोन क्लाउड कनेक्टेड भी होते हैं
iPhone में iCloud होता है तो Android में Google फोटो जैसी सर्विस होती है जो बैकग्राउंड में चुपचाप काम कर रही होती है। आप जैसे ही कोई फोटो खींचते हो वो अपने आप इंटरनेट के जरिए क्लाउड सर्वर पर अपलोड हो जाती है। अब अगर आपके फोन से फोटो को डिलीट भी कर दिया जाए यानी कि गैलरी से अगर उसे हटा भी दिया जाए तो भी वो फोटो सिंक के जरिए दोबारा फोन में दिख सकती है या कम से कम सर्वर पर सेव रहती है।
आप नोटिस करना कि जब आप अपना फोन बदलकर दूसरे फोन में सिर्फ अपना ईमेल आईडी लॉग इन करते हो तो तुरंत आपका सारा डाटा आपको मिल जाता है। यह सब कैसे पॉसिबल होता है? फिर से ये सवाल उठता है की आखिर ये Deleted Photos Kahan Jati Hai? ये सब पॉसिबल होता है क्लाउड की वजह से। यानी क्लाउड आपके डाटा को सेव करता रहता है। तब तक जब तक आप अपने डिवाइस के इस ऑप्शन को डीएक्टिवेट ना कर दें। जो जनरली कोई नहीं करता क्योंकि किसी को भी कभी भी अपने ही डाटा को रिकवर करने की जरूरत पड़ जाती है।
सोशल मीडिया
अगर आपने कोई फोटो वहां अपलोड की है और डिलीट कर दी है अपने फोन से तो भी उसकी कई कॉपी आपके फोन में या फिर उस साइट पर अवेलेबल रहती है। तो इस हिसाब से आपकी एक डिलीट की हुई फोटो आपके फोन में रहेगी, क्लाउड पर रहेगी और सोशल मीडिया के सर्वर पर रहेगी। यह तो हुए वो तरीके जिसके बारे में आपको पता होगा।
लेकिन आपके फोन में कुछ एप्स भी हैं जो कि इनडायरेक्ट तरीके से आपकी हर फोटो पर नजर रखती हैं। WhatsApp, Instagram, Snapchat, Facebook या फिर कोई ऐसी फोटो एडिटिंग ऐप, वहां सिर्फ आपको फोटो दिखाई नहीं देती बल्कि ये प्लेटफार्म जो है वो लगातार आपकी फोटोज को आपकी गैलरी से चुरा रहे होते हैं। कुछ ही सेकंड में कैश या फिर टेंपरेरी फाइल्स में वो स्टोर हो जाती है।
आखिर ये क्यों और कैसे हो जाता है?
सीधा जवाब यह है मान लीजिए किसी ने आपको WhatsApp पर एक फोटो भेजी है और आप उसे बार-बार खोल कर देखते हैं। अगर हर बार WhatsApp उस फोटो को ऐप के लिए सर्वर से फिर से डाउनलोड करेगा तो इससे आपका इंटरनेट डाटा भी ज्यादा खर्च होगा और ऐप भी स्लो हो जाएगी। तो आप नोटिस कीजिएगा इस परेशानी से बचने के लिए ऐप उस फोटो की एक कॉपी अपने सिस्टम में कैश के रूप में सेव कर लेती है। यानी कि जब जब आप उस फोटो को वापस से चैट में स्क्रॉल डाउन कर कर देखेंगे तो वो आपको नजर आ सकती है। फोटो एडिटिंग एप्स भी कुछ ऐसा ही करती है।
आम यूजर को इसका जरा सा भी अंदाजा नहीं होता क्योंकि यह सारी फाइलें फोन के अंदर उस फोल्डर में सेव हो जाती है जिसे हम अमूमन चेक ही नहीं करते। खैर इसमें सारा दोष आपके फोन एप्स का नहीं है। आपका भी है क्योंकि जब आप कोई ऐप पहली बार फोन में इंस्टॉल करते हैं तो वो तभी आपसे परमिशन मांगती है। जैसे कि आपकी फोटोस, आपकी मीडिया, आपके स्टोरेज का एक्सेस और आप बिना सोचे समझे अलाऊ का ऑप्शन टैप कर देते हैं। एक बार आपने इजाजत दे दी तो वो ऐप आपकी सारी फोटोज का इस्तेमाल करेगा ही और आपकी जरूरत के हिसाब से उनकी कॉपी को कैश या फिर टेंपरेरी फाइल्स में सेव करता रहेगा। तो दोस्ती अब तो आपको यह आईडिया हो ही गया होगा की Deleted Photos Kahan Jati Hai, तो चलिए आगे देखते है।
उसे कौन निकाल सकता है?
इंटरनेट पर ऐसे दर्जनों सॉफ्टवेयर मौजूद हैं जैसे कि Ease US Data रिकवरी या फिर डॉक्टर फोन जो दावा करते हैं कि वह आपकी डिलीट हुई फोटोस को वापस ला सकते हैं। प्रोफेशनल लेवल पर डिजिटल फॉरेंसिक टूल्स का इस्तेमाल होता है। पुलिस और जांच एजेंसियां इन्हीं टूल्स की मदद से उन फोटो से भी डाटा निकाल लेती हैं जिन्हें फॉर्मेट किया जा चुका है। अगर कोई हैकर आपके फोन का एक्सेस ले ले तो वह इन टूल्स का इस्तेमाल करके आपकी फोटो को रिकवर कर सकता है। जिनका एक्सेस शायद आपके पास भी ना हो।
कैसे जाने कि फाइल पूरी तरह से डिलीट हुई है या नहीं हुई है?
Quora के बताये अनुसार, तरीका है, सबसे पहले फोन स्टोरेज को एंक्रिप्ट कीजिए। Android और iPhone में इंक्रिप्शन का फीचर होता है जिसे आप इनेबल करना सीख जाइए। इससे आपका डाटा कोड में बदल जाएगा। अगर कोई उसे रिकवर भी कर ले तो बिना आपके पासवर्ड या बायोमेट्रिक्स के वह उसे पढ़ नहीं सकता। इसके बाद icloud स्कैनिंग पर, देखिये कि हर फोटोस को क्लाउड पर सेव करना है या नहीं करना यह आपका चॉइस है।
फोटोज आप प्राइवेट रखना चाहते हैं या फिर आप चाहते हैं कि कहीं ना कहीं आपको फ्यूचर में मिल जाए। इसके लिए आपको उस ऐप को परमिशन देनी होगी। साथ ही कोशिश करें कि फोन के जो बिन या ट्रैश हैं उसको आप मैनुअली क्लियर कीजिए। आप खुद भी जानते हैं कि डिलीट करने के बाद फोटो अक्सर 30 से 60 दिनों तक आपके रिसेंटली डिलीटेड फोल्डर में रहती है। तो अगर वो आपके काम की है ही नहीं तो आप क्यों ना उसे खुद से डिलीट कर दें।
App की परमिशन
आप इसे अपनी आदत बना लीजिए कि किसी भी ऐप को स्टोरेज का एक्सेस देना ही नहीं है। जरूरत पड़ती है तो Only This Time का ऑप्शन को क्लिक करें। इससे आप ऐप की मनमानी को रोक सकते हैं।\
Data Strutters Apps
यानी कि अगर आप अपने फोन को बेच रहे हो तो आई ट्रेडर्स जैसे एप्स का इस्तेमाल कीजिए। इसका फायदा यह होता है कि यह ऐप खाली जगह पर रैंडम डाटा भर देती है। जिससे पुरानी फोटो को रिकवर करना लगभग नामुमकिन हो जाता है।
Note:
डिजिटल दौर में हम जो भी करते हैं, उसका एक निशान पीछे रह ही जाता है जिसे हम कहते हैं डिजिटल फुटप्रिंट और राइट टू फॉरगेट जैसी बहस में हमेशा इस बात पर डिबेट रही है कि आप जो भी डिलीट कर रहे हैं उसका कोई भी फुटप्रिंट ना रहे। इस तरीके से पूरी की पूरी ऐप को डिजाइन किया जाए। लेकिन आपको भी ध्यान रखना होगा कि डिलीट का मतलब हमेशा कंप्लीट डिलीट नहीं होता है।
प्राइवेसी कोई ऐसी चीज नहीं है जो कंपनियां आपको थाली में परोस कर देंगी। इसके लिए हमें खुद ही जागरूक होना पड़ेगा। अपनी सेटिंग को चेक करना पड़ेगा। और अगली बार जब भी हम अलाव का बटन दबाएंगे तो एक सेकंड के लिए हम जरूर सोचेंगे कि आखिर यह सही भी है या नहीं। डिजिटल वर्ल्ड में डाटा माइनिंग का ही खेल जो है वो सबसे इंटरेस्टिंग और सबसे खतरनाक होता है।
क्या आप अपनी प्राइवेसी के लिए सिर्फ डेटा डिलीशन पे भरोसा कर सकते हैं या फिर सिर्फ यह एक अधूरा सच है जो हम सभी को फीड किया गया है ताकि हम और डाटा को जनरेट करते रह और इसका फायदा कोई और उठाता रहे। क्योंकि बात भी तो सही है Data Use The New Oil।
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