Bharat Bandh 12 February को लेकर देशभर में राजनीतिक और सामाजिक माहौल गरमाता जा रहा है। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने 12 फरवरी 2026 को देशव्यापी आम हड़ताल का आह्वान किया है, जिसे संयुक्त किसान मोर्चा और विभिन्न कृषि एवं ग्रामीण श्रमिक संगठनों का समर्थन भी मिल रहा है। यह हड़ताल केवल एक सामान्य विरोध प्रदर्शन नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे मौजूदा आर्थिक और श्रम नीतियों के खिलाफ व्यापक असंतोष की अभिव्यक्ति के रूप में देखा जा रहा है।

Bharat Bandh 12 February क्यों हो रहा है?
Bharat Bandh 12 February का मुख्य उद्देश्य सरकार द्वारा लागू किए गए नए श्रम कानूनों और आर्थिक नीतियों के खिलाफ विरोध दर्ज कराना है। ट्रेड यूनियनों का आरोप है कि हाल के वर्षों में लाए गए चार लेबर कोड श्रमिकों के पारंपरिक अधिकारों को कमजोर करते हैं और रोजगार की सुरक्षा को कम करते हैं। उनका कहना है कि कार्य घंटे, यूनियन बनाने की स्वतंत्रता और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों में बदलाव से श्रमिक वर्ग असुरक्षित हो सकता है। इसी पृष्ठभूमि में इस देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया गया है।
लेबर कोड पर विरोध क्यों?
नए लेबर कोड को लेकर मजदूर संगठनों का मानना है कि इससे स्थायी रोजगार की जगह अस्थायी या फिक्स्ड टर्म नौकरियों को बढ़ावा मिलेगा। उनका तर्क है कि इससे कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा, पदोन्नति और सामूहिक सौदेबाजी की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके साथ ही कार्य घंटे और ओवरटाइम से जुड़े नियमों में संभावित बदलाव को लेकर भी चिंता व्यक्त की जा रही है। इन सभी मुद्दों के कारण Bharat Bandh 12 February को श्रमिक संगठनों द्वारा एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
MGNREGA और ग्रामीण रोजगार का मुद्दा
ग्रामीण क्षेत्रों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को आजीविका की एक अहम योजना के रूप में देखा जाता है। यह योजना हर वर्ष करोड़ों ग्रामीण परिवारों को न्यूनतम 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराती है। आलोचकों का कहना है कि यदि इस योजना की संरचना में बदलाव किया जाता है या इसकी मांग-आधारित प्रकृति कमजोर होती है, तो इससे ग्रामीण गरीबों और कृषि श्रमिकों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी कारण किसान और ग्रामीण संगठनों ने भी Bharat Bandh 12 February को समर्थन दिया है।
बिजली बिल और कृषि से जुड़े मुद्दे
बिजली संशोधन बिल 2025 और सीड बिल 2025 को लेकर भी व्यापक चर्चा और विरोध देखने को मिल रहा है। विरोध करने वाले संगठनों का कहना है कि बिजली क्षेत्र में निजीकरण बढ़ने से सब्सिडी पर असर पड़ सकता है और किसानों की लागत में वृद्धि हो सकती है। वहीं बीज कानून से कृषि क्षेत्र में कॉर्पोरेट भागीदारी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि सरकार इन सुधारों को विकास और दक्षता के लिए जरूरी बता रही है, लेकिन आलोचक इसे आम जनता और किसानों के हितों के खिलाफ मानते हैं। इन मुद्दों ने भी Bharat Bandh 12 February को व्यापक समर्थन दिलाया है।
Bharat Bandh 12 February का क्या असर होगा?
यदि बड़ी संख्या में कर्मचारी और संगठन इस हड़ताल में भाग लेते हैं, तो बैंकिंग, परिवहन, औद्योगिक उत्पादन और कुछ सरकारी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि अंतिम स्थिति राज्यों की प्रशासनिक तैयारियों और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। आम नागरिकों को सलाह दी जा रही है कि वे 12 फरवरी को संभावित व्यवधानों को ध्यान में रखते हुए अपनी दैनिक योजनाएं बनाएं। इस प्रकार Bharat Bandh 12 February का असर क्षेत्र विशेष के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
क्या यह सिर्फ हड़ताल है या बड़ा राजनीतिक संदेश?
विश्लेषकों का मानना है कि Bharat Bandh 12 February केवल मजदूरी या रोजगार से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक दिशा, सामाजिक सुरक्षा और नीतिगत प्राथमिकताओं पर व्यापक बहस का हिस्सा बन चुका है। मजदूर और किसान संगठनों की संयुक्त भागीदारी इसे एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक संदेश के रूप में प्रस्तुत कर रही है। आने वाले समय में यह आंदोलन नीति-निर्माण और राजनीतिक विमर्श को किस हद तक प्रभावित करेगा, यह देखने वाली बात होगी।
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निष्कर्ष
समग्र रूप से देखा जाए तो Bharat Bandh 12 February देश की वर्तमान आर्थिक और श्रम नीतियों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण संयुक्त पहल के रूप में उभर रहा है। मजदूर, किसान और ग्रामीण संगठनों की एकजुटता इसे एक साधारण हड़ताल से कहीं अधिक व्यापक स्वरूप दे रही है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस आंदोलन का प्रभाव सरकार की नीतियों और भविष्य की राजनीतिक दिशा पर किस प्रकार पड़ता है।
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